बोधगया महाविहार को मुक्त करो: कनाडा में उठी वैश्विक मांग, बौद्ध अनुयायियों ने जताया विरोध
वैशाख माह, जिसे बौद्ध धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है, इस अवसर पर दुनिया भर में बुद्ध अनुयायी भगवान बुद्ध के उपदेशों और उनके ज्ञान की विरासत को याद करते हैं। इसी क्रम में कनाडा में बसे बौद्ध अनुयायियों ने “बोधगया महाविहार को मुक्त करो” अभियान के समर्थन में आवाज उठाई और भारत सरकार से महाबोधि महाविहार पर बौद्धों का पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित करने की मांग की।
बौद्ध अनुयायियों का कहना है कि बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के करोड़ों बौद्धों की आस्था और पहचान का केंद्र है। यही वह पवित्र स्थान है, जहां भगवान गौतम बुद्ध ने बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया था। इसके बावजूद आज भी इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल के प्रशासन में हिंदू प्रतिनिधित्व बना हुआ है, जिसे लेकर लंबे समय से विवाद जारी है।

क्या है बोधगया महाबोधि महाविहार?
महाबोधि महाविहार बिहार के गया जिले के बोधगया में स्थित है। यह यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) है। माना जाता है कि इसी स्थान पर लगभग 2500 वर्ष पहले सिद्धार्थ गौतम ने तपस्या के बाद ज्ञान प्राप्त कर बुद्धत्व हासिल किया था।
यह स्थान विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों के लिए सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है। श्रीलंका, थाईलैंड, जापान, म्यांमार, तिब्बत, नेपाल, भूटान और अन्य देशों से लाखों श्रद्धालु हर वर्ष यहां दर्शन के लिए आते हैं।
BT Act क्या है और विवाद क्यों?
महाबोधि मंदिर का प्रबंधन “बोधगया मंदिर अधिनियम 1949” (Bodh Gaya Temple Act – BT Act) के तहत संचालित होता है। इस कानून के अनुसार मंदिर प्रबंधन समिति में हिंदू और बौद्ध दोनों समुदायों के सदस्य शामिल किए जाते हैं।
वर्तमान व्यवस्था के तहत समिति में कुल सदस्य होते हैं, जिनमें बौद्ध और हिंदू प्रतिनिधियों की संख्या लगभग बराबर रखी जाती है। साथ ही, गया जिले का जिलाधिकारी समिति का अध्यक्ष होता है, और यदि जिलाधिकारी हिंदू न हो तो सरकार किसी हिंदू अधिकारी को अध्यक्ष नियुक्त कर सकती है।
यही व्यवस्था बौद्ध संगठनों और अनुयायियों के विरोध का मुख्य कारण है।
बौद्ध संगठनों की मुख्य मांगें
कनाडा सहित कई देशों के बौद्ध संगठनों का कहना है कि:
- महाबोधि महाविहार पूरी तरह बौद्धों का धार्मिक स्थल है।
- इसके प्रशासन और प्रबंधन पर केवल बौद्ध समुदाय का अधिकार होना चाहिए।
- BT Act को समाप्त या संशोधित किया जाए।
- मंदिर समिति से गैर-बौद्ध हस्तक्षेप समाप्त किया जाए।
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत बौद्धों को धार्मिक स्वतंत्रता और अपने धार्मिक संस्थानों के संचालन का अधिकार मिले।
बौद्ध अनुयायियों का तर्क है कि यदि अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों का संचालन संबंधित समुदायों के हाथ में होता है, तो महाबोधि महाविहार के मामले में अलग व्यवस्था क्यों लागू है।
“राम मंदिर ट्रस्ट में बौद्ध सदस्य नहीं, फिर महाबोधि में हिंदू क्यों?”
प्रदर्शन कर रहे कई बौद्ध कार्यकर्ताओं ने यह सवाल उठाया कि जब अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट में किसी बौद्ध प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया गया, तो महाबोधि महाविहार की समिति में हिंदू सदस्यों की अनिवार्यता क्यों रखी गई है।
उनका कहना है कि यह धार्मिक समानता और संवैधानिक अधिकारों के सिद्धांत के विपरीत है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा आंदोलन
पिछले कुछ वर्षों में “Free Mahabodhi Temple Movement” को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला है। भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, श्रीलंका, जापान और थाईलैंड जैसे देशों में भी बौद्ध समुदाय इस मुद्दे को उठा रहा है।
सोशल मीडिया पर भी #FreeMahabodhiTemple और #BodhGayaForBuddhists जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। कई बौद्ध विद्वानों का मानना है कि महाबोधि महाविहार केवल भारत की नहीं, बल्कि वैश्विक बौद्ध विरासत का प्रतीक है।
संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता का प्रश्न
भारतीय संविधान प्रत्येक धर्म को अपने धार्मिक मामलों के संचालन की स्वतंत्रता देता है। अनुच्छेद 26 धार्मिक समुदायों को अपने धार्मिक संस्थान स्थापित और संचालित करने का अधिकार प्रदान करता है।
बौद्ध संगठनों का कहना है कि महाबोधि महाविहार पर बाहरी नियंत्रण इस संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है। वहीं कुछ लोग यह भी तर्क देते हैं कि वर्तमान व्यवस्था सामाजिक संतुलन और ऐतिहासिक कारणों से बनाई गई थी।
निष्कर्ष
महाबोधि महाविहार केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि मानवता, शांति और ज्ञान का वैश्विक प्रतीक है। बौद्ध समुदाय लंबे समय से इसके पूर्ण प्रबंधन अधिकार की मांग कर रहा है। कनाडा में उठी हालिया आवाज यह दर्शाती है कि यह मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है।
अब देखना यह होगा कि भारत सरकार और संबंधित संस्थाएं इस मांग पर क्या रुख अपनाती हैं। लेकिन इतना तय है कि बोधगया महाविहार को लेकर बहस आने वाले समय में और तेज हो सकती है।

कनाडा में बौद्ध अनुयायियों ने वैशाख माह के दौरान बोधगया महाबोधि महाविहार को बौद्धों को सौंपने और BT Act खत्म करने की मांग उठाई। जानिए पूरा विवाद और बौद्ध संगठनों की मांग।