बहनजी की दूरदर्शी सोच : 15 साल बाद तैयार हुआ बेहट का 133 करोड़ का स्पोर्ट्स कॉलेज
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जब भी विकास योजनाओं और बड़े बुनियादी ढांचे की चर्चा होती है, तो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती (बहनजी) के कार्यकाल का उल्लेख अवश्य होता है। उनके शासनकाल (2007–2012) में प्रदेश भर में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सिंचाई और खेल के क्षेत्र में अनेक महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की शुरुआत की गई। इनमें से कई परियोजनाएं समय पर पूरी हुईं, जबकि कुछ विभिन्न प्रशासनिक, तकनीकी और राजनीतिक कारणों से वर्षों तक अधूरी रहीं।
ऐसी ही एक महत्वपूर्ण परियोजना है सहारनपुर जिले की बेहट तहसील के गांव शेरुल्लापुर जाटोवाला में 133 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित स्पोर्ट्स कॉलेज, जिसका उद्घाटन अब लगभग 15 वर्ष बाद होने जा रहा है। यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि किसी सरकार द्वारा बनाई गई दूरगामी योजनाएं कई बार लंबे समय बाद भी समाज को लाभ पहुंचाती हैं।
2010 में रखी गई थी नींव
इस स्पोर्ट्स कॉलेज की आधारशिला वर्ष 2010 में बसपा सरकार के दौरान रखी गई थी। उस समय मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने और ग्रामीण युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई खेल संस्थानों की योजना बनाई थी। इसी क्रम में बेहट क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से युक्त स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित करने का निर्णय लिया गया।
परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की गई, बजट स्वीकृत हुआ और निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया। उस समय इसकी अनुमानित लागत करीब 133 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी।
बीच में आती रहीं बाधाएं
हालांकि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद यह परियोजना लगातार कई तरह की बाधाओं का सामना करती रही। सरकार बदलने के बाद प्राथमिकताएं भी बदल गईं। परिणामस्वरूप निर्माण कार्य कई बार धीमा पड़ा और कुछ समय के लिए लगभग ठप भी हो गया।
तकनीकी कारणों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं, वित्तीय स्वीकृतियों और अन्य औपचारिकताओं के चलते परियोजना को पूरा होने में अपेक्षा से कहीं अधिक समय लग गया। लगभग डेढ़ दशक तक यह निर्माणाधीन रहा।
अब होगा उद्घाटन
अब जब स्पोर्ट्स कॉलेज पूरी तरह तैयार हो चुका है तो उसके उद्घाटन की तैयारी की जा रही है। स्थानीय लोगों में खुशी है कि वर्षों से जिस संस्थान का इंतजार किया जा रहा था, वह आखिरकार शुरू होने जा रहा है।
कॉलेज शुरू होने के बाद सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों के खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर खेल शिक्षा और प्रशिक्षण मिल सकेगा।
मायावती सरकार की योजनाओं की चर्चा

बसपा समर्थकों का कहना है कि यह परियोजना पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। उनका तर्क है कि यदि वर्ष 2010 में यह योजना शुरू नहीं की जाती, भूमि अधिग्रहण नहीं होता और बजट स्वीकृत नहीं होता, तो आज यह स्पोर्ट्स कॉलेज अस्तित्व में नहीं होता।
उनके अनुसार, 2007 से 2012 के बीच बसपा सरकार ने प्रदेश में अनेक विकास योजनाओं की नींव रखी थी, जिनमें सड़कें, पुल, विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, पार्क, स्मारक और खेल संस्थान शामिल थे। इनमें से कई परियोजनाओं का लाभ आज भी प्रदेश की जनता को मिल रहा है।
खेल प्रतिभाओं को मिलेगा लाभ
स्पोर्ट्स कॉलेज का सबसे बड़ा लाभ क्षेत्र के युवाओं को मिलेगा। यहां एथलेटिक्स, हॉकी, फुटबॉल, कबड्डी, कुश्ती, वॉलीबॉल सहित विभिन्न खेलों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था होने की संभावना है।
इसके अलावा खिलाड़ियों के लिए छात्रावास, आधुनिक खेल मैदान, जिम, चिकित्सा सुविधाएं और अनुभवी प्रशिक्षकों की व्यवस्था भी की जाएगी। इससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने में मदद मिलेगी।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा

किसी भी बड़े शैक्षणिक या खेल संस्थान का प्रभाव केवल शिक्षा या खेल तक सीमित नहीं रहता। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है।
कॉलेज शुरू होने के बाद आसपास के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। परिवहन, होटल, किराए के मकान, छोटे व्यापार और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ेगी। इससे बेहट क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
राजनीतिक चर्चा भी तेज
स्पोर्ट्स कॉलेज के उद्घाटन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हैं। बसपा समर्थक सोशल मीडिया पर यह कह रहे हैं कि जिस परियोजना की शुरुआत मायावती सरकार ने की थी, उसका उद्घाटन अब दूसरी सरकार के कार्यकाल में हो रहा है।
हालांकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह सामान्य प्रक्रिया है कि किसी सरकार द्वारा शुरू की गई परियोजना को बाद की सरकार पूरी कर सकती है और उसका उद्घाटन कर सकती है। विकास कार्यों की निरंतरता लोकतंत्र की महत्वपूर्ण विशेषता मानी जाती है।
जनता की अपेक्षा

स्थानीय नागरिकों की सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि कॉलेज केवल उद्घाटन तक सीमित न रहे, बल्कि जल्द से जल्द नियमित रूप से संचालित भी हो। प्रशिक्षकों की नियुक्ति, खेल सामग्री की उपलब्धता और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए ताकि यह संस्थान अपने उद्देश्य को पूरा कर सके।
निष्कर्ष
बेहट के शेरुल्लापुर जाटोवाला में बना 133 करोड़ रुपये का स्पोर्ट्स कॉलेज उत्तर प्रदेश की उन लंबी अवधि वाली विकास परियोजनाओं में शामिल है, जिनकी शुरुआत वर्ष 2010 में हुई और जिन्हें पूरा होने में लगभग 15 वर्ष लग गए। यह परियोजना एक ओर मायावती सरकार द्वारा शुरू की गई विकास योजनाओं की याद दिलाती है, वहीं दूसरी ओर यह भी दर्शाती है कि बड़े सार्वजनिक निर्माण कार्य कई बार प्रशासनिक और अन्य कारणों से वर्षों तक लंबित रह सकते हैं।
अब जबकि यह स्पोर्ट्स कॉलेज तैयार है, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका लाभ क्षेत्र के खिलाड़ियों और युवाओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचे। यदि यहां उच्च स्तर की खेल सुविधाएं और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है, तो यह संस्थान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।