यहां रविदास जी के 10 मशहूर दोहे उनके मतलब के साथ दिए गए हैं:

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यहाँ Ravidas जी के 10 प्रसिद्ध दोहे/पद अर्थ सहित दिए गए हैं:


1️⃣
मन चंगा तो कठौती में गंगा।
👉 अर्थ: मन शुद्ध हो तो हर स्थान पवित्र है।


2️⃣
ऐसा चाहूँ राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न।
छोट बड़ो सब सम बसें, रैदास रहे प्रसन्न।।

👉 अर्थ: ऐसा समाज जहाँ सब बराबर हों और किसी को कमी न हो।


3️⃣
जाति-जाति में जाति है, जो केतन के पात।
रैदास मनुष न जुड़ सके, जब तक जात न जात।।

👉 अर्थ: जाति-भेद मानव एकता में बाधा है।


4️⃣
प्रभुजी तुम चंदन हम पानी, जाकी अंग-अंग बास समानी।
👉 अर्थ: भक्त और भगवान का गहरा संबंध।


5️⃣
अब कैसे छूटे नाम रट लागी।
👉 अर्थ: प्रभु-नाम का प्रेम कभी नहीं छूटता।


6️⃣
हरि सा हीरा छोड़ि के, करे आन की आस।
ते नर जमपुर जाहिंगे, सत भाषे रैदास।।

👉 अर्थ: ईश्वर को छोड़कर अन्य की आशा करना व्यर्थ है।


7️⃣
जो हम शरणि परे हरि के, ता को नाहीं डर।
रैदास दास दास कहै, राखो लाज हमारी।।

👉 अर्थ: जो प्रभु की शरण में है उसे भय नहीं।


8️⃣
रैदास कहे सुनो भाई साधो, हरि बिन कौन सहाई।
👉 अर्थ: भगवान के बिना कोई सच्चा सहारा नहीं।


9️⃣
ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै।
गरीब निवाजु गुसाईंया मेरा माथै छत्रु धरै।।

👉 अर्थ: प्रभु ही गरीबों के रक्षक हैं।


🔟
मन ही पूजा मन ही धूप,
मन ही सेऊँ सहज स्वरूप।।

👉 अर्थ: सच्ची भक्ति मन से होती है, बाहरी आडंबर से नहीं।

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