Historical

निर्भय नारी: बहुजन समाज की सशक्त महिला – बहन कुमारी मायावती

भारत के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास में बहुजन समाज की महिलाओं ने अनेक संघर्षों के बावजूद अपनी पहचान बनाई है। ऐसी ही एक निर्भय,...

શું તમને ખબર છે? કાળો દોરો ક્યારેક અસ્પૃશ્યતાનું પ્રતિક હતો!

એક સમય હતો જ્યારે સમાજમાં ભેદભાવ એટલો ઘેરો હતો કે કેટલાક લોકોને માણસ તરીકે પણ માન મળતું નહોતું. કહેવામાં આવે છે કે કેટલાક પ્રદેશોમાં...

नारीवादी लेखिका और आंबेडकरी आंदोलन की सशक्त आवाज

बेबी कोंडिबा कांबले, जिन्हें स्नेहपूर्वक “बाबीताई” कहा जाता था, भारत की अग्रणी दलित नारीवादी लेखिकाओं में से एक थीं। वे महाराष्ट्र की महार जाति...

माता रमाई ने सोने का कंगन क्यों बेचा?

🌼 माता रमाबाई: त्याग, सेवा और महानता की एक अनोखी निशानी भारत की सामाजिक क्रांति के इतिहास में अगर महानता के पैमाने पर लोगों को...

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने मंदिर प्रवेश आंदोलन क्यों किया?

📜 2 मार्च 1930 – कालाराम मंदिर प्रवेश सत्याग्रह इतिहास साक्षी है कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने मंदिर प्रवेश का मुद्दा केवल धार्मिक कारणों से...

चमार रेजिमेंट का इतिहास (1943–1946): कोहिमा और इम्फाल युद्ध में वीरता

बैटल ऑनर ऑफ कोहिमा: #द_चमार_रेजिमेंट का स्थापना दिवस 1 मार्च 1943 भारतीय सैन्य इतिहास में 1 मार्च 1943 का दिन विशेष महत्व रखता है। इसी...

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