कोच्चि: केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को बहुचर्चित कन्नूर डेंटल कॉलेज छात्र नितिन राज आत्महत्या मामले में अहम फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी डॉ. एम. कोडंडा राम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। डॉ. राम अंजरकंडी स्थित कन्नूर डेंटल कॉलेज के डेंटल एनाटॉमी विभाग के प्रमुख हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अनुसूचित जाति से आने वाले प्रथम वर्ष के छात्र नितिन राज को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, जिसके बाद छात्र ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।
10 अप्रैल को कॉलेज परिसर में गंभीर हालत में मिले थे नितिन
23 वर्षीय नितिन राज कन्नूर के अंजरकंडी डेंटल कॉलेज में बीडीएस प्रथम वर्ष के छात्र थे। 10 अप्रैल को दोपहर लगभग 1:30 बजे उन्हें कॉलेज परिसर में गंभीर रूप से घायल अवस्था में पाया गया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि उन्होंने कॉलेज की इमारत से छलांग लगाई थी।
परिवार ने लगाया जातीय उत्पीड़न का आरोप

नितिन के परिवार का आरोप है कि दलित समुदाय से होने के कारण उन्हें कॉलेज के डेंटल एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. एम. कोडंडा राम और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. के.टी. संगीता नंबियार द्वारा लगातार अपमानित किया जाता था। परिवार का कहना है कि छात्र को जातिसूचक टिप्पणियों, गाली-गलौज और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा था।
नितिन की बहन निकिता ने आरोप लगाया कि डॉ. राम ने कक्षा में नितिन को “स्लम डॉग” कहकर संबोधित किया था। परिवार के अनुसार, उन्होंने इस संबंध में कॉलेज प्राचार्य से शिकायत भी की थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
ऑडियो क्लिप में सामने आए गंभीर आरोप
मामले में सामने आए कथित ऑडियो क्लिपों ने जांच को नया मोड़ दिया है। इनमें नितिन राज अपनी परेशानी का जिक्र करते हुए बताते हैं कि डॉ. राम ने उन्हें “इडियट” कहा, उनकी मां की सर्जरी का मजाक उड़ाया और उनके आंतरिक अंक काट दिए।
एक अन्य ऑडियो क्लिप में नितिन कहते सुनाई देते हैं,
“मैंने जितना सहन किया, किया… कल क्लास में ध्यान दे रहा था तो उन्होंने मेरी मां और उनकी सर्जरी पर टिप्पणी की।”
नितिन ने यह भी आरोप लगाया था कि उन्हें धमकी दी गई थी कि यदि उन्होंने परिसर छोड़ा तो उनके अंक कम कर दिए जाएंगे।
दोनों शिक्षकों को किया गया निलंबित
घटना के अगले दिन 11 अप्रैल को कॉलेज प्रशासन ने डॉ. एम. कोडंडा राम और डॉ. के.टी. संगीता नंबियार को निलंबित कर दिया। इसके बाद 12 अप्रैल को पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r) और 3(2)(v) के तहत आरोप लगाए गए हैं, जो अनुसूचित जाति के सदस्य का सार्वजनिक रूप से अपमान करने और जाति आधारित अपराधों से संबंधित हैं।
सात सदस्यीय एसआईटी कर रही जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सात सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। जांच एजेंसियों ने नितिन का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और उसकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। साथ ही कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), चैट्स और वायरल ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता की भी जांच की जा रही है।
हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से किया इनकार

शुक्रवार को केरल उच्च न्यायालय ने डॉ. एम. कोडंडा राम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए माना कि मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। अदालत के इस फैसले को जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
न्याय की मांग तेज
नितिन राज की मौत के बाद छात्र संगठनों, दलित संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह मामला उच्च शिक्षण संस्थानों में कथित जातिगत भेदभाव और छात्रों के मानसिक उत्पीड़न को लेकर एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है।

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