ग्वालियर/भिंड, मध्य प्रदेश:
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में 15 वर्षीय दलित नाबालिग लड़की के कथित अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म, हत्या और शव जलाकर सबूत मिटाने के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस घटना को लेकर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
क्या है मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भिंड जिले की रहने वाली 15 वर्षीय दलित नाबालिग 28 मई 2026 से लापता थी। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने उसी दिन नामजद शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
1 जून को नाबालिग का शव बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस ने समाज के लोगों की उपस्थिति में अंतिम संस्कार कराया। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि पुलिस ने शुरुआती शिकायत पर तत्परता से कार्रवाई की होती तो शायद बच्ची की जान बचाई जा सकती थी।
चंद्रशेखर आजाद ने क्या कहा?
चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह घटना केवल अपराधियों की क्रूरता ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी गंभीर उदाहरण है।
उन्होंने लिखा कि यह मामला कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है और समाज की संवेदनाओं को झकझोरने वाला है। उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने की मांग की।
प्रमुख मांगें

चंद्रशेखर आजाद ने मध्य प्रदेश सरकार से निम्नलिखित मांगें रखीं—
1. उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच
पूरे मामले की स्वतंत्र एवं समयबद्ध जांच कराई जाए ताकि सभी तथ्य सामने आ सकें।
2. दोषियों को कठोरतम सजा
अपहरण, दुष्कर्म, हत्या और सबूत मिटाने जैसे गंभीर अपराधों में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
3. एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
4. पुलिस लापरवाही की जांच
यदि प्रारंभिक शिकायत के बावजूद पुलिस ने उचित कार्रवाई नहीं की, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो।
5. पीड़ित परिवार को सहायता
परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता, सुरक्षा और निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए।
6. फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई
मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराकर शीघ्र न्याय सुनिश्चित किया जाए।
सामाजिक न्याय और सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर महिलाओं, विशेषकर दलित समुदाय की बेटियों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों को शीघ्र सजा देने की मांग की है।
पीड़ित परिवार के प्रति देशभर से संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं और न्याय की मांग लगातार तेज हो रही है।

jai bheem