शहीद-ए-आज़म उधम सिंह: जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लेने वाले महान क्रांतिकारी

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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास अनेक वीरों के साहस, बलिदान और देशभक्ति की गाथाओं से भरा हुआ है। उन्हीं महान क्रांतिकारियों में से एक थे शहीद-ए-आज़म उधम सिंह, जिन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लेकर भारतीयों के आत्मसम्मान की रक्षा की।

13 मार्च 1940 का दिन भारतीय इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इसी दिन लंदन के कैक्सटन हॉल (Caxton Hall) में आयोजित एक सभा के दौरान उधम सिंह ने माइकल ओ’डायर को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। माइकल ओ’डायर उस समय पंजाब का गवर्नर रह चुका था और जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए परोक्ष रूप से जिम्मेदार माना जाता था।

जलियांवाला बाग हत्याकांड की पृष्ठभूमि

13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में हजारों भारतीय बैसाखी के अवसर पर एकत्र हुए थे। इसी दौरान ब्रिटिश अधिकारी जनरल रेजिनाल्ड डायर ने बिना किसी चेतावनी के वहां मौजूद निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया। इस क्रूर गोलीबारी में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों घायल हो गए।

इस अमानवीय घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। उस समय पंजाब के गवर्नर माइकल ओ’डायर थे, जिन्होंने जनरल डायर की कार्रवाई का समर्थन किया था। इसलिए उन्हें भी इस नरसंहार का परोक्ष जिम्मेदार माना गया।

उधम सिंह का संकल्प

जलियांवाला बाग की घटना के समय उधम सिंह स्वयं वहां मौजूद थे और उन्होंने अपनी आंखों से इस भीषण नरसंहार को देखा था। इस घटना ने उनके मन में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ गहरा आक्रोश भर दिया।

उधम सिंह ने उसी समय प्रण लिया कि वे इस हत्याकांड के दोषियों को सजा जरूर देंगे। उनका मुख्य लक्ष्य जनरल डायर था, जिसने गोली चलाने का आदेश दिया था। लेकिन जब उधम सिंह लंदन पहुंचे और उन्होंने जांच की, तो पता चला कि जनरल डायर की पहले ही मृत्यु हो चुकी है

इसके बाद उन्होंने उस व्यक्ति को निशाना बनाया जिसने इस नरसंहार को राजनीतिक समर्थन दिया था—माइकल ओ’डायर

लंदन में लिया प्रतिशोध

13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में एक कार्यक्रम के दौरान उधम सिंह ने मौका देखकर माइकल ओ’डायर पर गोली चला दी। इस हमले में माइकल ओ’डायर की मौके पर ही मौत हो गई।

उधम सिंह ने यह कदम जलियांवाला बाग में मारे गए निर्दोष भारतीयों के लिए न्याय के रूप में उठाया था। इस घटना के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

शहादत

ब्रिटिश सरकार ने उधम सिंह पर मुकदमा चलाया और 31 जुलाई 1940 को लंदन की पेंटनविल जेल में उन्हें फांसी दे दी गई।

लेकिन उनका बलिदान भारतीयों के दिलों में आज भी जीवित है। उन्होंने दुनिया को यह संदेश दिया कि अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना ही सच्ची देशभक्ति है

श्रद्धांजलि

आज, 13 मार्च को हम उस महान क्रांतिकारी को नमन करते हैं जिसने जलियांवाला बाग के शहीदों की पीड़ा को अपना दर्द समझा और न्याय के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

भारत के सच्चे स्वतंत्रता सेनानी, शहीद-ए-आज़म उधम सिंह को शत-शत नमन। 💐🙏

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