डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर ने संयुक्त राज्य अमेरिका को अत्यंत सम्मान और प्रशंसा की दृष्टि से देखा। 1913 से 1916 के बीच कोलंबिया विश्वविद्यालय में बिताया गया उनका समय उनके विचारों को गहराई से प्रभावित करने वाला रहा। अमेरिका में उन्होंने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों को व्यवहार में देखा, जिसने उनके सामाजिक और राजनीतिक विचारों को नई दिशा दी।
शैक्षणिक प्रभाव
कोलंबिया विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान आंबेडकर प्रसिद्ध दार्शनिक जॉन डेवी से अत्यधिक प्रभावित हुए। डेवी के प्रैग्मैटिज़्म (व्यावहारिक दर्शन) और सामाजिक सुधार के विचारों ने आंबेडकर की सोच को आकार दिया। इसी प्रभाव के कारण आंबेडकर ने समाज सुधार और लोकतांत्रिक मूल्यों को अपने राजनीतिक दर्शन का आधार बनाया।
संवैधानिक प्रेरणा
भारतीय संविधान के निर्माण में आंबेडकर ने अमेरिकी संविधान से प्रेरणा ली, विशेष रूप से “बिल ऑफ राइट्स” से। भारत के मौलिक अधिकारों की अवधारणा में इस प्रभाव को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। कुछ समय के लिए उन्होंने “यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ इंडिया” जैसी संघीय संरचना की कल्पना भी की थी, जिसमें शक्तिशाली संघीय व्यवस्था और राष्ट्रपति प्रणाली जैसे तत्व शामिल हो सकते थे।
नागरिक अधिकारों की समानता
आंबेडकर ने अमेरिका में अश्वेत समुदाय और भारत में दलितों की सामाजिक स्थिति के बीच समानताएँ देखीं। उन्होंने प्रसिद्ध अफ्रीकी-अमेरिकी विचारक और नागरिक अधिकार नेता डब्ल्यू.ई.बी. डू बोइस से पत्राचार भी किया। दोनों ने अपने-अपने समाजों में व्याप्त भेदभाव और सामाजिक अन्याय पर विचार साझा किए।
विदेश नीति और विकास की दृष्टि
आंबेडकर का मानना था कि भारत के आधुनिकीकरण में अमेरिका एक महत्वपूर्ण सहयोगी बन सकता है। वे अमेरिका की तकनीकी प्रगति, आर्थिक शक्ति और लोकतांत्रिक संस्थाओं से प्रभावित थे। इस कारण वे सोवियत गुट की तुलना में अमेरिका के साथ मजबूत संबंधों को भारत के विकास के लिए अधिक उपयोगी मानते थे।
समालोचनात्मक दृष्टि
हालाँकि आंबेडकर अमेरिकी लोकतंत्र और उसके आदर्शों से प्रभावित थे, उन्होंने वहाँ मौजूद नस्लीय भेदभाव की भी आलोचना की। उन्होंने अमेरिका में नस्लवाद और भारत में जाति व्यवस्था के बीच कई समानताएँ देखीं और इसे सामाजिक न्याय की वैश्विक चुनौती के रूप में समझा।
विरासत
आज आंबेडकर की विरासत को अमेरिका में भी सम्मान के साथ याद किया जाता है। कोलंबिया विश्वविद्यालय में उनके योगदान और अध्ययन को मान्यता दी जाती है, और उनकी स्मृति में कई शैक्षणिक व सांस्कृतिक पहलें चल रही हैं।
इस प्रकार, डॉ. आंबेडकर के लिए अमेरिका केवल एक देश नहीं था, बल्कि लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और आधुनिकता के विचारों का एक महत्वपूर्ण स्रोत था। फिर भी उन्होंने इन आदर्शों को आलोचनात्मक दृष्टि से देखा और उन्हें भारतीय समाज की वास्तविकताओं के अनुरूप ढालने का प्रयास किया।

jai bheem
It is very true that no one like dr.Ambedkar has ever happened or will ever happen.